"माता पिता बच्चों का बचपन संवांरे,संस्कारवान बनाए, अपने से दूर रखकर संस्कारहीन न बनायेंं"-शर्मा
रायपुर 11जून,(राधेश्याम वैष्णव) यदि बालक को माता पिता बचपन में घर से दूर छात्रावास में अध्ययन हेतु भेज देते हैं तो वह संस्कारवान बनने की अपेक्षा संस्कार हीन बनेगा। बालक छात्रावास में भूख काटता है, अपनापन नहीं पाता है। बड़ा होकर वह संस्कार विहीन आचरण के तहत बुड्ढे माता पिता को वृद्धाश्रम में डाल देता है अतः बच्चों का बचपन घर में ही बिताएं। पंडित ओमप्रकाश महाराज ने उलहाने भरे लहजे में उपस्थित हजारों महिला पुरुषों को कहा कि हर हाल में बच्चों के बचपन के साथ न्याय करें, उनके साथ पूतना जैसा व्यवहार नहीं करें। उक्त विचार पंडित ओम प्रकाश शर्मा ने तहसील क्षेत्र के नांदशा- जागीर ग्राम के रावला चौक में चुंडावत परिवार द्वारा आयोजित भागवत कथा सप्ताह के छठे दिन धर्म सभा में व्यास पीठ से व्यक्त किए। महाराज द्वारा भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं का बहुत ही मार्मिक वर्णन कर दर्शकों को भक्तिभाव में रंग दिया। गोविंद मेरो है गोपाल मेरो है....... भजन पर श्रोता नित्य करने लगे तो पूरा पांडाल झूम झूम कर तालियां बजाने लगा। कथा में पूर्व मंत्री डा.रतनलाल जाट, वल्लभनगर विधायक गजेंद्रसिंह शक्तावत, पूर्व प्रधान मनोहरसिंह चुंडावत, पूर्व प्रधानाचार्य शंकरसिंह राणावत, पूर्व भाजपा जिला उपाध्यक्ष पर्वतसिंह चुंडावत, पूर्व प्रधान राजेंद्र त्रिवेदी, भाजपा मंडल अध्यक्ष रघुवीर सिंह जोगरास, कोशीथल ग्राम पंचायत के पूर्व सरपंच बलवंत सिंह चुंडावत, पूर्व भाजपा मंडल उपाध्यक्ष जगदीश चंद्र काबरा, राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय के जिला उपसभाध्यक्ष रमेशचंद्र वैष्णव, कांग्रेस युवा नेता दिनेश झंवर, भाजपा युवा मोर्चा अध्यक्ष दिनेश माली, महामंत्री प्रह्लाद कुम्हार, समाजसेवी राजेंद्रसिंह चौहान, रामलाल सुथार, भगवतीलाल टांक, जगदीशचंद्र सुथार, जगदीशचंद्र दाधीच, मनीष त्रिवेदी, बद्री सुथार, भेरूलाल शर्मा, पं.राधेश्याम वैष्णव, ललित सुथार, सत्यनारायण शर्मा सहित सैकड़ों महिला-पुरुष उपस्थित थे। भागवत कथा आयोजक नांदशा सरपंच भैरूसिंह चुंडावत ने समस्त अतिथियों का स्वागत माल्यार्पण - दुपट्टा - साफा बंधन से किया।माता जी की झांकी मुख्य आकर्षण का केंद्र रही। अंत में महाआरती के साथ प्रसाद वितरण के बाद छठे दिन की कथा का समापन हुआ।