"जिस घर के सदस्यों मे आपसी तालमेल व पवित्र प्रेम होता है वहाँ परमात्मा का वास होता है"-शर्मा

रायपुर 8 जून, (राधेश्याम वैष्णव)जहां पति-पत्नी में आपसी प्रेम होता है, पवित्र प्रेम होता है, वहां परमात्मा आते हैं । अनुसूया के पति व्रत धर्म पालन के कारण एक नहीं तीनों देव बेटे बनकर आए। एक बार नहीं दो-दो बार आए। भारत की नारी चंद्रमा, मंगल ग्रह को नहीं जाती चंद्रमा बनाने वाले को अपने घर बुलाती है। बेटा बनाती, नचाती है। वह घर में ही मंगल बुला लेती है। उक्त विचार पंडित ओम प्रकाश शर्मा ने तहसील क्षेत्र के नांदशा-जागीर ग्राम पंचायत मुख्यालय के रावला चौक में भागवत कथा के दूसरे दिन शुक्रवार को व्यासपीठ से व्यक्त किए। महाराज ने कहा कि शास्त्रों की हमारे जीवन में बहुत आवश्यकता है। जहां शास्त्र नहीं होते हैं वहां शस्त्र चलते हैं व आपसी मारा-मारी होती है । शास्त्र हमें सुबह से सूर्यास्त की क्रिया, जन्म से मरण तक की क्रियाएं बताते हैं जो हमेशा सुखदाई, स्वास्थ्यदायी, प्रेरणादाई होती है। भागवत कथा के मध्य "घूमा दे म्हारा बालाजी...." भजन की मधुर व सजीव प्रस्तुति ने कथा में उपस्थित  महिलाओं को भावभरा नृत्य करने को मजबूर कर दिया। बालाजी की मनमोहक झांकी ने दर्शकों में खूब भक्ति का भाव भरा। कथा के अंत में संगीतमय भागवत की आरती की गई।

कथा रात्रि 8बजे से 11बजे तक चल रही है। कथा में सरपंच भैरुसिंह चुण्डावत, ठा. शत्रुदमनसिंह, शंभूसिंह, समाजसेवी गणपतसिंह राणावत, भैरुनाथ धाम के भोपा पोखरराम गुर्जर, राजेंद्रसिंह चौहान,भारत विकास परिषद के सचिव रमेशचंद्र वैष्णव, रामलाल सुथार,भगवतीलाल टांक सहित सैंकड़ों महिला पुरुष उपस्थित थे। 

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