"सदाचार और आध्यात्मिकता से ही व्यक्ति महान बनता है"-शर्मा
रायपुर 24 जुलाई (राधेश्याम वैष्णव)मानव जीवन में जो व्यक्ति सदाचार और आध्यात्मिकता की शरण में जाकर निज पर शासन ,फिर अनुशासन की बात धारण करता हैं ,वही सच्चे अर्थों में महान कहलाता हैं । उक्त विचार तहसील क्षेत्र के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय- पालरा में आयोजित संगोष्ठी में युग निर्माण योजना मथुरा के वानप्रस्थी कार्यकर्ता और कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री मुरलीधर शर्मा ने व्यक्त किये। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ.सत्यनारायण सत्य ने की । इस अवसर पर कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि रत्नेश शास्त्री ,व्याख्याता यतीन्द्र सिंह,घनश्याम चौधरी ,रामावतार मेहर,प्यारचंद रेगर,मदनलाल खटीक,दिनेश सेन,राजकुमार महरिया,मंजुबाला डाकोत,खेमराज कुमावत,महावीर मेघवाल,महावीर मीणा,राजेन्द्र त्रिवेदी सहित समस्त छात्र छात्राएं और विद्यालय परिवार उपस्थित रहा । कार्यक्रम में शांतिकुंज हरिद्वार से आए महात्मा ने बच्चों को गायत्री मंत्र का महत्व बताते हुए इसका सही उच्चारण करना भी सिखाया। वहीं उन्होंने गायत्री मंत्र के सभी शब्दों का सही अर्थ समझाया। महात्मा ने बच्चों को ज्ञान के महत्व से अवगत करवाते हुए बताया कि पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों को आध्यात्मिकता से जुड़े़ रहना भी जरूरी है। क्योंकि इससे बच्चों में बचपन से ही जहां अच्छे संस्कार आते हैं वहीं वे देश के अच्छे युवा बन सकते हैं। उन्होनें बच्चों को योग के बारे में बताते हुए कहा कि योग से न केवल एकाग्रता बढ़ती है बल्कि उनकी स्मरण शक्ति बढऩे के साथ-साथ नैतिक विकास भी होता है।समारोह के अंत में स्कूल के समस्त स्टाफ ने महात्मा जी का आभार व्यक्त किया ।