सुअर के बच्चों को भूखा देख एक कुतिया मे जागा ममत्व और पिलाया अपना दूध


रायपुर 16 जुलाई (राधेश्याम वैष्णव)इंसान, इंसान से नफरत करते हुए अक्सर देखने को मिलता है। जाति और वर्ग भेद भी इंसान ही करता है लेकिन आज पशु, पशु से प्रेम करता हुआ हर जगह दिखाई देता है। क्योंकि पशुओं में ऊंच-नीच की भावना नहीं होती है। उन्हें सब अपने नजर आते हैं। हमें भी इन अलग अलग प्रजाति के पशुओं की सामाजिक-समरसता को देखकर अवश्य सीख लेनी चाहिए। हमारे मन में भी मनुष्यत्व जगना चाहिए। जीवन क्षणभंगूर है अतः प्रत्येक व्यक्ति के जीवन को महत्व देना चाहिए है। 


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